बच्चे पर माता-पिता के कौन से 10 लक्षण ज्यादा असर करते हैं

मोनिका अग्रवाल

17th March 2021

जब भी बच्चा छोटा होता है, तो माता-पिता के बीच इस बात को लेकर लड़ाई होती है, कि आखिर वो दोनों में से किस पर गया है। बच्चा बड़ा होता है तो उसके लक्षणों से पता चलता है कि उसे माता-पिता में से किसके लक्षण मिले हैं।

बच्चे पर माता-पिता के कौन से 10 लक्षण ज्यादा असर करते हैं

बच्चे पर माता-पिता के लक्षण ज्यादा असर करते हैं

अकसर पैरेंट्स अपने बच्चों  में अपनी परछाई देखते हैं। ना सिर्फ चेहरा, बल्कि आदतों से लेकर ऐसे कई लक्षण होते हैं जो कभी कभी हु-बहू आपसे मिलते हैं। ये मात्र एक संयोग नहीं है, ये आपकी तरफ से बच्चे को मिली एक ऐसी विरासत होती है, जो ताउम्र उसके साथ रहती है। कोई बच्चे अपनी मां पर जाते हैं तो कोई अपने पिता पर। कुछ बच्चे माता-पिता को छोड़कर परिवार के अन्य सदस्यों के उपर चले जाते हैं, या उन्हीं की तरह व्यवहार शैली को अपनाते हैं। लेकिन देखा जाए तो ये ज्यादा सम्भव है कि बच्चा अपने माता-पिता के लक्षणों को ही ज्यादातर अपनाता है। शोध की मानें तो लड़की में XX और लडकों में XY जीन होते हैं। अगर लड़का है तो उसके अंदर मां की ओर ज्यादा लगाव होता है, और वहीं अगर लडकी है तो उसका झुकाव पिता की ओर होता है। और लक्षण भी काफी हद तक प्रभावी होते हैं। आज इस खास लेख के जरिये हम आपको खास इसी बिषय पर ज्यादा जानकारी देंगे, और आपको ये भी बताएंगे कि बच्चे पर माता-पिता के कौन से लक्षण ज्यादा असर करते हैं।

पहले हम जानते हैं मां से मिलने वाले 10 लक्षण जो  अधिकांश बच्चों में देखने को मिल जाते हैं।

  1. लेफ्ट हैंडी-लेफ्ट हैंडी यानि की अपना सारा काम करने के लिए बाएं हाथ का ही इस्तेमाल करना। ये अनुवांशकीय होता है। अगर बच्चे के पिता लेफ्ट हैंडी हैं तो बच्चे पर ये लक्षण देखने को मिल सकते हैं और शायद नहीं भी। लेकिन वहीं अगर मां लेफ्ट हैंडी है तो बच्चे के लेफ्ट हैंडी होने की संभावना और भी बढ़ जाती है। अगर माता-पिता दोनों ही लेफ्टी होते हैं, तो बच्चे के अंदर शत प्रतिशत ये गुण आता है। बच्चे के अंदर ये लक्षण काफी अनोखा होता है। क्योंकि बच्चे के अंदर ऐसे गुण माता-पिता के व्यक्तित्व को भी दर्शाते हैं।

2.डायबिटीज- आज के समय में डायबिटीज होने की कोई भी उम्र सीमा निर्धारित नहीं है। माता-पिता से बच्चे तक ये बिमारी आसानी से पहुंच सकती है । अगर बच्चे को जन्म देने वाली मां डायबिटीज से पीड़ित होती है, तो ऐसा सम्भव है कि बच्चे को भी डायबिटीज हो। प्रेगनेंसी के दौरान मां अपने डायबिटीज के स्तर को कंट्रोल रख सकती है। जिससे बच्चे स्वस्थ्य रहता है।  और यदि मां को टाइप 1 डायबिटीज है तो, शोध भी इसी बात की पुष्टि करते हैं कि जन्म के तुरंत बाद बच्चे तक डायबिटीज पहुंच सकती है।जिसके लक्षण शुरू के कुछ हफ्ते में हर हाल में बच्चे में देखने को मिल सकते हैं।

3.स्लीपिंग स्टाइल- बच्चे के सोने के तरीके ज्यादातर उसकी मां से मेल खाते हैं। अगर मां को अनिद्रा की शिकायत है तो हो सकता है कि बच्चे को भी अनिद्रा की शिकायत रहे। ये सबसे आम आनुवंशिक लक्षणों में से एक है। डिलीवरी के बाद अगर मां अपने बच्चे के साथ ज्यादा समय बिताती है तो ये लक्षण समय के साथ साथ खत्म भी हो सकता है।

4.लाइम डिजीज- ये एक तरह से स्किन में इस्चिंग के साथ सूजन करने वाली बीमारी है, जो टिक्स की वजह से होती है। इसे हम गंभीर कह सकते हैं लेकिन ये जानलेवा बिल्कुल नहीं है। प्रेगनेंसी के दौरान अगर मां को ये डिसीज होती है तो ये अजन्मे बच्चे तक पहुंच सकती है। बच्चे के लिए काफी खतरनाक हो सकता है। अगर आप अपने गर्भ में बच्चे को सुरक्षित रखना चाहती हैं, तो प्रेगनेंसी के दौरान ही इस डिजीज का उपचार कर लें 

5.ड्रग्स की लत- बच्चे में ड्रग्स की लत आनुवंशकीय और DNA का बड़ा रोल निभा सकता है। अगर प्रेगनेंसी के दौरान मां ड्रग्स का सेवन करती है तो खून के जरिये ड्रग्स बच्चे तक पहुंचता है। जब बच्चे का जन्म होता है तो, वो भी ड्रग्स का आदि हो जाता है। बच्चे की इस लत को छुड़ाना काफी मुश्किल होता है। 

6.एच आई वी-  जिन माताओं को एचआईवी है, वे इसे अपने अजन्मे बच्चों को दे सकती हैं। यदि वह गर्भावस्था के दौरान नहीं इंफेक्शन पास करती तो बच्चा स्तनपान के माध्यम से या शरीर के तरल पदार्थों के आदान-प्रदान के माध्यम से उसे इनहेरिट कर सकता है।

7-म्यूटेशन-यह समस्या डीएनए के फैलने से होती है जो कि वापस अपनी अवस्था में आने पर थोड़ा बदल जाता है और बच्चों में अपने माता पिता से यह बीमारी के सिम्टम्स शरीर में पहुंच सकते हैं। अगर मां में यह परेशानी है तो यह बच्चों में होने की अधिक संभावना रहती है।

8-हाशिमोटो का रोग- यह रोग तब होता है जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली थायरॉयड पर हमला करती है। हाशिमोटो की बीमारी अक्सर मां या उसके परिवार के किसी सदस्य से बच्चे में जा सकती है। यदि माँ को थायरॉइड की कोई समस्या है या हाशिमोटो की परेशानी है, तो बच्चों की जांच भी जरूरी है।

9-बाल और उसका रंग-बालों के रंग और प्रकार का निर्धारण करने में प्रमुख और आवर्ती जीन एक बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। इस बात की अधिक संभावना है कि बच्चे को बालों के रंग और बनावट के लिए माँ के ही प्रमुख जीन विरासत में मिलेंगे।

10-हनटिंग्टन रोग-यह एक बहुत गंभीर विकार है जो तंत्रिका तंत्र की धीमी गति से क्षति का कारण बनता है। यह मां से बच्चे में स्थानांतरित हो जाता है, और कोई वास्तविक इलाज नहीं है। केवल रोकथाम यह सुनिश्चित करती है कि गर्भावस्था के दौरान किसी भी विषाक्त पदार्थों को कभी न लें।

अब जानते हैं पिता से मिलने वाले 10 लक्षण जो  अधिकांश बच्चों में देखने को मिल जाते हैं।

1-आंख का रंग- बच्चे की आंखों का रंग निर्धारित करने में प्रमुख और आवर्ती जीन की भूमिका होती है। गहरे रंग की आंखें डोमिनेंट जीन यानी आवर्ती जिनके कारण होती हैं और हल्के रंग की आंखें रिसेसिव जीन से मिलती हैं। यदि माता-पिता दोनों के बीच डोमिनेंट रंग हैं, तो बच्चे को पिता से आंखों का रंग मिलता है।  

2-हाइट-अगर पिता की हाइट लंबी है तो ज्यादा चांसेस रहते हैं कि बच्चा भी लंबा हो। अगर मदर की मां की हाइट कम है तो भी बच्चा मां जितनी हाइट का हो सकता है। असल में दोनों माता-पिता के जींस मुख्य भूमिका निभाते हैं।

3-गालों में डिंपल-अधिकांश संभावना पिता से मिलने की रहती है। गालों में गड्ढे पड़ने के लक्षण बच्चों में पिता से ही अधिकतर पहुंचता है क्योंकि यह एक डोमिनेंट ट्रेट है। हालांकि इससे फेशियल डिफॉरमेटी माना गया है मेडिकल टर्म में। लेकिन जिसके पास गालों में डिंपल होते हैं वह देखने में सुंदर लगता है।

4-फिंगरप्रिंट्स-किसी भी व्यक्ति के फिंगरप्रिंट एक से नहीं होते। यहां तक कि बच्चों के भी । चाहे वे जुड़वा ही क्यों ना हो। किसी भी व्यक्ति में फिंगर प्रिंट एकसे नहीं हो सकते। लेकिन कुछ केस में संभावना रहती है कि बच्चा फिंगरप्रिंट के लक्षण अपने पिता जैसे ले सकता है। माना कि फिंगर प्रिंट पेटर्न बिल्कुल सेम नहीं होगा, लेकिन उसके ज्यादा से ज्यादा एक जैसी दिखने की संभावना रहती है।

5-होंठ- जब होठों की आकृति की बात करते हैं तो पिता से मिलने वाले जींस ज्यादा प्रभावी रहते हैं। असल में दोनों लिप्स यानी की होंठ डोमिनेंट ट्रेट हैं। जो बच्चे में पिता से ही आते हैं।

6-छींकना-"आछ्छू"... सिंड्रोम के नाम से जाना जाता है। जब कोई व्यक्ति सीधा लाइट की तरफ देखता है तो उसको छींक आती है। यह सिंड्रोम बच्चे में पिता से ही ट्रांसफर हो सकता है क्योंकि यह एक डोमिनेंट जेनेटिक ट्रेट है।

7-दांतों की बनावट-दांतों की बनावट भी अनुवांशिकी है जो कि बच्चे में पिता से ही अधिकतर जाती है और दातों के बीच का गैप भी बच्चे में पिता के समान ही अधिकांश देखने को मिलता है।

8-मेंटल डिसऑर्डर-यह डिसऑर्डर माता-पिता दोनों से ही बच्चे में अनुवांशिकी जा सकता है। लेकिन शोध बताते हैं कि ज्यादा संभावना पिता से बच्चे में यह लक्षण आने की रहती है। इनमें से कुछ खास अनुवांशिक डिसऑर्डर हैं मेंटल डिसऑर्डर, शिजोफ्रेनिया और ए डी एच डी।

9-दिल की बीमारी-शिशुओं को अपने पिता से ये जीन विरासत में मिलता है। जो कोरोनरी हृदय रोग के खतरे को बढ़ा सकता है। यह पिता के अद्वितीय आनुवंशिक मेकअप के कारण होता है,जिसके पास उस तरह का जीन हो।

10-बांझपन- शोध बताते हैं कि जिन आदमियों का स्पर्म काउंट कम होता है और जिन्होंने विट्रो फर्टिलाइजेशन के द्वारा बेबी प्लान किया हो, वे अपने पुत्रों को बांझपन लक्षण दे सकते हैं। हाल के शोध में कहा गया है कि बांझपन पिता से विरासत में मिले आनुवांशिक लक्षणों में से है।

माता पिता के लक्षण बच्चों में आना स्वाभाविक है। अगर आदतें अच्छी हैं तो जाहिर सी बात है कि, बच्चे में आने वाले लक्षण में अच्छे होंगे तो आगे की जिंदगी संवार सकते हैं, वहीं अगर लक्षण खराब हुए तो बच्चों का जीवन संकट में हो सकता है। इसलिए अपने परिवार के इतिहास के बारे में खुद को शिक्षित करना, बच्चे पैदा करने का निर्णय लेने से पहले एक अच्छा कदम है। इस जानकारी का उपयोग करके, आप बहुत सी बातों को डॉक्टर से डिस्कस कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें-9 पर्सनल हाइजीन की आदतें जो हर बच्चे के लिए जानना जरूरीटीनएजर्स के लिए तेजी से हाइट बढ़ाने के 10 असरदार टिप्स

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